Saturday, April 22, 2006

रजनीश भाई के सवालों के जवाब

Question --- (कुल मिला कर आर्थिक रुप से सम्पन्न जीवन मिल रहा है भारत में. आज भी पर भारत में रहना घाटे का सौदा है केवल आर्थिक रुप से देखा जाऍ तो) काली भईया, इन दोनों बातों का आपसी मेल समझ नहीं आया।

Answer -- मित्र चुँकी आप संगीत पसंग हैं; फर्क है इन दो गानो काः

आ जा की जिन्दगी है छोटी
अपने घर पर भी है रोटी

बाप बडा न भईया
न ईश्वर है ना मईया
द होल थिंग इस दैट की भईया सबसे बडा रुपइया.

Question -- थोड़ा ठीक से समझाईए. अंत की कुछ बातें भी ऊपर से निकल गईं।
Answer -- सीधा हिसाब है की हरे पत्ते को पाना बहुत मुश्किल और रिस्की रास्ता हो गया है अतः ग्यानी जन बसने का ईरादा त्याग कर कंम्पनियाँ कूदते रहते हैं

Question -- कुल मिलाकर बात ये समझ नहीं आई कि अभी आप वहां ख़ुश हैं कि नहीं
Answer -- हम तो ठहरे यायावरी रमते जोगी. धन से प्रेम बहुत है पर जीवन धन से बहुत उपर है. वैसे भी हमारा हरा पत्ता मिल चुका है तो हम इस समस्या से मुक्त हैं.

2 Comments:

Blogger रजनीश मंगला said...

काली भईया, आपकी बात समझ में आती है। सारा जीवन विदेश में बिता पाना संभव है कि नहीं, अच्छा है कि नहीं, मुझे भी नहीं मालूम।

10:56 AM  
Blogger इंद्र अवस्थी said...

Aa gaye New York, Chalo shubh kaamnaaye hamaaree taraf se.

Rajnish, Hare patte waale ko to sab taraf hara hee hara dikhta hai.

11:17 AM  

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