Sunday, August 06, 2006

आप क्या करते हैं

मुझसे जब भी यह प्रश्न किया जाता है मन में कुछ सवाल आते हैं. क्यों पूछ रहे हो? जान कर क्या करोगे? क्या फर्क पडता है? तुमसे मतलब? कई काम करता हुँ, सुबह जाग कर नहाता हुँ जनाब किस किस विषय में बताऊँ. कई लोग तो जानने को ईतने आतुर होते हैं की नाम पुछने से पहले ही सवाल दाग देते हैं. हमारे देसीजनों में यह सवाल ज्यादातर जल्दी निकल आता है. कई बार मैने खेल कर देखा है ईस सवाल के मारफत लोगों से. जैसे कभी बोल देता हुँ किराने की दुकान पर काम करता हुँ, कभी की बार टेन्डर हुँ, कभी की वेटर हुँ, कभी की वाल स्र्टीट पर लाखों करोडो कमाने वाला ट्रेडर हुँ. बहुत मजेदार रंग देखें हैं लोगों की आँखों में. समझ कभी नही आया की क्यों कर पैसे वाला बनते ही लोग बहुत मिलनसार हो जाते हैं. क्या फर्क पडता है. जितने भी व्यवसाय गिनाऍ हैं सभी में मित्रजन हैं. सबसे ज्यादा काम तो बार टेन्डर और वेटर ही आया है. कभी किसी रईस से पैसा थोडे ही चहिऐ जो रईसों से मित्रता का दिखावा करें.
अमेरिका में पहली पिढी के भारतीयों में पैसे की हाव और होड जिस मात्रा में है वो किसी में नही है. धन ही जीवन है, जो जलन दुसरों की सफलता पर मैने देखी है, तौबा ! कभी नही समझा क्यों. कोई समझाओ मुझे की क्या वजह है ईस कुंठा जलन की. कोम्पिट करने की भावना, प्रगतिशील होना तो सही है पर किसी और की सफलता से मेरे जीवन पर क्या असर? कोई समझाओ मुझे.

5 Comments:

Anonymous आशीष said...

काली भाई , वैसे आप क्या करते है ?

11:42 PM  
Blogger अनूप शुक्ला said...

अरे काली भाई ,कहाँ रहे इतने दिन? क्या करते रहे?

11:45 AM  
Anonymous Tarun said...

अरे काली भाई, आप न्यूयार्क में वैसे करते क्या हैं ;)

7:34 PM  
Anonymous संजय बेंगाणी said...

बड़ा बेहुदा मगर पसन्दीदा सवाल हैं.
सबसे ज्यादा खराब तब लगता हैं, जब आप बेरोजगार होते हैं.

9:57 PM  
Anonymous राज गौरव said...

अरे काली जी,
आसान है.. लोगों से ही पूछ लीजिये कि वो क्युं जलते हैं.. वैसे मुझे ऐसे लोगों को जलाने मे अत्यंत आनंद आता है.. :)
वैसे जान के अच्छा लगा कि आप भी कंप्यूटर बाबा के पुजारी हैं.. ;)

7:07 AM  

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