Saturday, September 03, 2005

खिचङी

लो आज फिर हम आ टपके
रोजमर्रा की बाते कहेंगे कुछ हटके
देश विदेश की खबरों के पुलिन्दे में
खााऐंगे चने जाहे जबान पर लगें चटके

बातें करें कुछ देश महान की
केतरिना के प्रलय कान्ड की
बहते सङते अवशेषों से शहर भरे
उनमें सहारा तलाशते अश्वेत ईन्सान की

बात करें कुछ नवाबी शान की
शिशु हिरण के रक्तपान की
कानुन मर्यादा की पहुँच से परे
बुढे शेेर के शाही खानदान की

बात करें मेरे भारत महान की
ईटली से लाईं हुक्मरान की,
सत्ता कुन्जी को अपने दामन में धरे,
देश चला रही बहू फिरोज खान की.

तो आज फिर हम आ टपके,
चाहे हमने लगाने कुछ नए झटके,
'नकी'और 'के'की खिचङी बना काली
पतली गली से झटपट सटके.

8 Comments:

Blogger अनूप शुक्ला said...

तुम तो कवि भी हो गये वाह्!

7:23 PM  
Blogger Laxmi N. Gupta said...

अच्छा लिखा है, कालीचरण जी।

लक्ष्मीनारायण

7:05 PM  
Blogger राजेश कुमार सिंह said...

कविता जानदार है ।
लेकिन "देश चला रही बहू फिरोज खान की " के बारे में कोई बतायेगा ?
(यहाँ हमारा सामान्य ज्ञान धोखा दे रहा है।)

-राजेश

4:04 AM  
Blogger राजेश कुमार सिंह said...

This comment has been removed by a blog administrator.

4:06 AM  
Blogger Pratik said...

वाह भाई ..... बहुत बढिया। लेकिन राजेश जी वाली समस्‍या हमारी भी है, ज़रा स्‍पष्‍ट करें।

3:59 AM  
Blogger आशीष श्रीवास्तव said...

कविता अच्छी है लेकिन राजेश भाई वाला तो प्रश्न हमारा भी है !

7:29 PM  
Blogger Nitin Bagla said...

शायद यहाँ कालीचरण जी का मतलब फिरोज गाँधी(खान)की बहू सोनिया गाँधी से है.....

2:29 AM  
Blogger Kalicharan said...

जरा गुगल मारिए फिरोज गाँधी पर. जनाब का असली नाम फिरोज खान था.

6:04 AM  

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