Sunday, August 21, 2005

क्विक स्टार की किक

अमेरिका में अगर कोई भारतीय आपकी तरफ पहचान-बढाऊ मुस्कान फैंकता है तो तुरन्त मनहूसियत का जामा पहन लिजिए. ऐसे खडूस बन जाईए जैसे ताईवान या तिब्बत का नाम सुन के चीनीजन हो जाते हैं. अगर आप महिला हैं तो शशिकला या ललिता बेबी टाईप शक्ल बना लिजिए, और गर आप पुरुष हैं तो तुरन्त प्रेम चोपडा या फिर रन्जीत जैसी. इस पर अगर सामने वाली की मुखदृष्टि थोडी मुरझा जाए तब आप ध्यानपूर्वक, किसी भी समय निकल लेने के सारे रास्ते खुले रखते हुए, बहुत सावधानी से आगे बढें तथा जी भर कर पारस्परिक मुँह खुजली मिटाने के कार्यक्रम को सम्पन्न करें. किन्तु अगर आपकी पहले की गई बेरुखी पर सामने वाले ने पूरी ढिढाई दिखाई हो तथा वह आपसे चेटने बढ रही हो तो समझ लिजिए आप के पास १ ही रास्ता बचा है. सामने वाले का मुँह कुछ ध्वनि निकाले उसके पहले ही स्पष्ट बोल दिजिए की आप मानसिक बिमारी के शिकार हैं तथा क्विक स्टार का नाम सुनते ही हाथापाई पर उतर आते हैं. जनाब कसम उडान छल्ले की मैडम आपकी शक्ल पर नजरों से अन्गारे बरसाते हुए निकल लेंगी.
यहाॅ के भारतीय समाज में मेल मिलाप बढाने के रास्ते की सबसे बढी रुकावट है क्विक स्टार. जिस को भी इस का कीडा काट खाया हो उसे अपने मित्रों की गिनती में से निकाल दिजिए क्योंकी अब वह आपका मित्र नही २४ घन्टे सेल्समैन बन गया है.उसका सारी क्षमता बस अब अपना नेटवर्क बनाने तथा बढाने में लगने वाली है. आप अब उसके मित्र नही ५-१० नए सदस्यों को लाने का जरिया बन चुके हैं. हाल ही मे सुनने आया की यह बिमारी भारत में देश-प्रेम का जामा पहन कर स्वदेशी स्कीम के द्वारा फैल रही है.
मेरा इस नशे, इस मानसिक बिमारी से पीडित पढे-लिखे लोगों से सवाल है की भईया ईतना दुत्कार, ईतनी जिल्लत किस लिए ? हर बाशिन्दे को नया सौदा समझना छोडो. शायद थोडा बहुत धन कमा भी लो पर क्या ऐसी सोच में जीना, अौर अपने परिवार को इस ढान्चे में ढालना आगे चल कर नुकसान नही देगा.

6 Comments:

Blogger अनूप शुक्ला said...

भारत में भी 'एम वे' जैसे नाम से यह बीमारी काफी गहरे धंस गयी है। डर लगता है किसी 'एमवे ' धारी से नमस्ते करते हुये भी।

10:53 PM  
Blogger आलोक said...

ऐम्वे और क्विक्स्टार एक ही हैं। मेरे मकान मालिक को भी ऐसा ही चस्का चढ़ा था। उन दिनों जब भी देखो मेरी ओर मुस्कान बिखेरता रहता था। पर अब नॉर्मल हो गया है, उम्मीद है कि बुखार जल्द उतर गया होगा। उसके झाँसे में नहीं पड़ा, अच्छा हुआ। और पता चला कि मेरे पड़ोसी ने चार हज़ार रुपए फूँक के ऐम्वे की किट ख़रीदी थी। लेकिन पहले ही हिम्मत खो बैठे इसलिए पाला नहीं पड़ा। मुर्गे जैसे जगह जगह से दाना चुगते हैं, भले ही सूखे गोबर में क्यों न हो, उसी प्रकार ये ऐम्वे-क्विक्स्टार वाले प्राणी जहाँ देखो वहाँ चुगने लगते हैं। इन्ही के लिए कहा गया है,

दोस्त दोस्त ना रहा,
प्यार प्यार ना रहा।

12:05 AM  
Blogger Raman Kaul said...

बहुत ही सही मुद्दे पर उंगली रखी है। हम ने भी ऐसे मित्र भुगते हैं। ऐसे लोग अक्सर वालमार्ट जैसी जगहों पर साध लगाए बैठते हैं। मुझे एक बार ऐसा ही बन्दा मिला जो मेरा मित्र बनना चाहता था, और मैंने उसे अनजाने में घर बुला लिया। जैसे ही उस ने "धन्धे" की बात करते हुए काग़ज़ कलम निकाला, मैं ने कहा कि क्विक्स्टार की बात नहीं सुनूँगा। कंपनी की सफाई में कुछ बेमतलब बातें कहने के बाद भाई साहब पतली गली से निकल लिए। उन के जाते ही मैं ने गूगल पर खोज कर के क्विक्स्टार के मारे हुओं के किस्सों की बेशुमार कड़ियाँ उन को मेल कर दीं। साथ ही पता चला कि अगले दिन NBC पर डेटलाइन कार्यक्रम में क्विक्स्टार जैसी कंपनियों पर एक पोल-खोलू रिपोर्ट आने वाली है। मैंने उन को फोन किया, उन्होंने नहीं उठाया तो सन्देसा छोड़ा कि एक बार फिर घर बुला रहा हूँ यह कार्यक्रम साथ देखने के लिए। उस के बाद साहब कहीं नज़र नहीं आए।

6:42 AM  
Blogger Raman said...

आपने बहुत ही सही मुद्दे की तरफ ध्यान दिलाया है. मैं कई दिनों से क्विकस्टार , ऐमवे और बी डब्लू डब्लू(Quixtar , Amway , BWW ) के शैतानी धंधे के बारे में अपने हिन्दी ब्लाग में लिखना चाहता था. मैं खुद क्विकस्टार में एक साल तक फंसा हुआ था. मैंने अपने अंग्रेजी ब्लाग में क्विकस्टार के बारे में लिखा था. जल्द ही अपने हिन्दी ब्लाग में विस्तार से इसके बारे में लिखूंगा

10:25 PM  
Blogger इंद्र अवस्थी said...

Ram bachaye Amway walon se. is par to ek skit likhi ja sakti hai

11:06 PM  
Blogger रेलगाड़ी said...

I know many people in India..poor people in villages, who've gotten duped by the Amway 'success stories' and lost thousands of Rupees. Good Topic.

9:30 AM  

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