tag:blogger.com,1999:blog-9337690.post-1136267650113049252006-01-02T22:53:00.000-07:002006-01-02T22:54:10.133-07:00अधूरा पोस्ट२००६ की शुरुआत तो बहुत मजेदार रही. एक मित्र के यहाँ पार्टी में गए. बढिया खाना-पीना, कैरम, ताश आदि खेल और देर रात तक अंताक्शरी का कार्यक्रम चला. मौज करने का बहाना है, वर्ना सभी दिन एक से ही होते हैं. १ जनवरी की सुबह कौन सा सुरज पश्चिम से निकलता है.<br /><br />आज-कल मित्रों और घर के काम की वजह से बढिया बकर नही हो पा रही है यहाँ. दिमाग उलझा है जीवन के छोटे-बङे कार्यों में, संधर्षों में. चल रहा है जितना ईन्दौर में छप्पन की चाट दुकानें. क्या है की जबर बकास निकालने के लिए दिमाग एक तरह की अघोरी बाबा उज्जैन वाले तरह की सोच में रहना चाहिए, तबही ईंसान का ध्यान दुनिया भर की बकवास में जाता है. जैसे मानो आप ट्रेन में जा रहे हों तो अगर आप किसी किताब में लगे हैं तो आप का ध्यान साहनी साहब के बकवास ईश्तिहार पर जाने से तो रहा. तो अभी ईस पोस्ट को अधूरा मान के समाप्त करता हुँ. आज-कल में कुछ ज्यादा विषय सामग्री वाला पन्ना काला करुँगा.Kalicharanhttp://www.blogger.com/profile/13820034560677352485noreply@blogger.com